पूज्य वरिष्ठ प्रवर्तक श्री रूपमुनि जी महाराज 'रजत'
पूज्य वरिष्ठ प्रवर्तक श्री रूपमुनि जी महाराज 'रजत' जैन श्रमण परंपरा के एक प्रतिष्ठित संत, ओजस्वी वक्ता, साहित्यकार एवं समाज प्रेरक हैं।
अल्पायु में संयम जीवन को स्वीकार कर आपने धर्म, शिक्षा, सेवा एवं सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
संस्कृत, प्राकृत, आगम एवं दर्शन के गहन अध्ययन के साथ आपने देशभर में धर्मप्रभावना का कार्य किया।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं देश के अनेक राज्यों में आपके प्रेरणादायी प्रवचन, सरल व्यक्तित्व एवं लोकहितकारी कार्यों ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है।
आपके मार्गदर्शन में अनेक धार्मिक, शैक्षणिक, चिकित्सीय एवं सामाजिक सेवा परियोजनाएँ स्थापित हुईं, जो आज भी जनकल्याण के कार्य में निरंतर सक्रिय हैं। आपकी वाणी में ओज, विचारों में स्पष्टता एवं व्यक्तित्व में अद्भुत प्रभावशीलता का समन्वय देखने को मिलता है।
‘रूप रजत विहार ‘ पूज्य गुरुदेव के दूरदर्शी चिंतन, समाज सेवा की भावना एवं सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। यह केवल एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि ऐसा आध्यात्मिक एवं सामाजिक केंद्र है जहाँ संस्कार, सेवा, सद्भाव और सामूहिकता का संगम होता है। गुरुदेव की प्रेरणा से निर्मित यह परिसर आने वाली पीढ़ियों के लिए समाज, संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को सशक्त बनाने का एक स्थायी प्रयास है
"रूप रजत विहार केवल एक भवन नहीं, बल्कि पूज्य गुरुदेव श्री रूपमुनि जी महाराज 'रजत' के सेवा, संस्कार और समाज निर्माण के संकल्प का साकार स्वरूप है।"